1956 के बाद बने भारत के नए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (Formation of New States and Union Territories After 1956)

Political Map of India
भारत में नए राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया सिर्फ 1956 तक ही सिमित नहीं रही. यह प्रक्रिया अभी तक जारी हैं. और शायद भविष्य में भी जारी रहेगी. 2019 में ही, भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य का विभाजन कर दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और लदाख को बनाया जाना हैं. इसके बाद भारत में राज्यों की संख्या 29 से घटकर 28 हो जायेगी, वही संघशासित प्रदेशो की संख्या 7 से बढ़कर 9 हो जायेगी.

गुजरात और महाराष्ट्र: बॉम्बे राज्य को बॉम्बे (पुनर्गठन) अधिनियम, 1960 के द्वारा मराठी भाषी महाराष्ट्र और गुजराती भाषी गुजरात में विभाजित कर दिया गया था।

दादरा एवं नागर हवेली: 1954 में दादरा एवं नागर हवेली के आजाद होने से पहले यहाँ पर पुर्तगाल का शासन था. आजादी मिलने के बाद, 1961 तक यहाँ के लोगो ने ही इधर का शासन चलाया. और 10वे संविधान संशोधन के साथ इसे भारत गणराज्य में 1961 में एक केंद्र शासित प्रदेश की तरह शामिल कर लिया गया.

गोवा, दमन और दीव: 1961 में पुलिस कार्रवाई के माध्यम से भारत ने गोवा, दमन और दीव को अधिग्रहित कर लिया। उन्हें 1962 में 12वे संवैधानिक संशोधन अधिनियम  के द्वारा एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया।

पुदुचेरी: पुडुचेरी भारत का एक हिस्सा बनाने से पहले, फ्रांस का एक्सक्लेव था. जिसे पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम या फ्रेंच इंडिया के नाम से जाना जाता है। 1954 में भारत के बढ़ती मजबूती को देखते हुए फ्रांस ने इस क्षेत्र को भारत को सौंप दिया। इसे 1962 तक एक 'अधिग्रहित क्षेत्र'  के श्रेणी में रखा गया और 1962 में 14 वें संवैधानिक संशोधन के द्वारा इसे एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया।

नागालैंड: नागालैंड का गठन नागा हिल्स और असम के तुएंसंग इलाके को मिलाकर नागालैंड राज्य अधिनियम, 1962 के द्वारा 1963 में हुआ. हलांकि नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से पहले नागालैंड को कुछ दिनों के लिए राष्ट्रपति के आदेश पर असम के गवर्नर ने चलाया.

हरियाणा और चंडीगढ़: 1966 में पंजाब (पुनर्गठन) अधिनियम, 1966 के द्वारा पंजाब से हिंदी भाषी हरियाणा को अलग कर एक नया राज्य बना दिया गया। इसके साथ ही चंडीगढ़ को पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी और एक नया केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया. इस अधिनियम के अनुसार पंजाब के कुछ पहाड़ी इलाको को भाषा के अनुसार हिमाचल प्रदेश, जो उस वक़्त एक केंद्र शासित प्रदेश था, में जोड़ दिया गया.

हिमाचल प्रदेश: 1971 में हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम, 1970 के द्वारा हिमाचल प्रदेश का दर्जा बढाकर राज्य बना दिया गया।

मेघालय: मेघालय को सबसे पहले 23 वीं संवैधानिक संशोधन के द्वारा असम के भीतर एक उप-राज्य के रूप में तराशा गया। और बाद में, 1971 में पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम 1971 द्वारा इसे एक पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया.

मणिपुर और त्रिपुरा:
इन राज्यों को पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के द्वारा केंद्रशासित प्रदेशों की स्थिति से ऊँचा उठा दिया गया।

सिक्किम: सबसे पहले सिक्किम को 35 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1974 द्वारा एक सहयोगी राज्य का दर्जा दिया गया। फिर बाद में, 36 वे संशोधन अधिनियम, 1975, के द्वारा इसे एक पूर्ण राज्य के रूप बढ़ा दिया गया। यह गौर करने वाली बात हैं कि 1947 से 1974 तक,  भारत सिक्किम का एक रक्षक देश था। सिक्किम ने भारत को अपने रक्षा,  बाहरी मामलों और संचार का जिम्मा दे रखा था।

मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा: 1987 में, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के तीन नए राज्य क्रमशः भारतीय संघ के 23 वें, 24 वें 25 वें राज्यों के रूप में अस्तित्व में आए। मिजोरम को यह दर्जा 1986 में हुए मिज़ो शान्ति समझौते के बाद मिला. वही राजनैतिक अभिलाषाओ को देखते हुए 1987 में गोवा को राज्य का दर्जा दे दिया गया और वही पर दमन और दीव को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश प्रदेश बना दिया गया।

छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड: सन 2000 में भारत में  तीन और नए राज्य छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड जुड़ गए. इन्हें क्रमशः मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को काटकर बनाया गया। यह एक दिलचस्प बात है कि पुनर्गठन के वक़्त उत्तराखंड का नाम उत्तरांचल था। जिसे सिर्फ 2007 में ही बदला गया हैं।

तेलंगाना: तेलंगाना को 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग कर भारत का 29 वें राज्य के रूप में बनाया गया।

जम्मू और कश्मीर और लदाख: 31 अक्टूबर 2019 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में बदलाव कर जम्मू और कश्मीर को दो नए केंद्र प्रशासित राज्यों में बात दिया गया हैं.